कांवड़ यात्रा सावन के महीने की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है, जिसमें लाखों शिव भक्त (कांवड़िए) हरिद्वार, गोमुख या गंगोत्री से गंगाजल भरकर पैदल अपने गृह क्षेत्र के शिव मंदिरों तक ले जाते हैं। 2026 में यह यात्रा 30 जुलाई से 28 अगस्त तक पूरे सावन महीने के दौरान चलेगी।
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जल कब चढ़ाएं? ज्यादातर कांवड़िए सावन के सोमवार (3, 10, 17, 24 अगस्त) या सावन शिवरात्रि (11 अगस्त) पर जल चढ़ाना सबसे शुभ मानते हैं। कई भक्त आखिरी सोमवार यानी 24 अगस्त को जल चढ़ाकर यात्रा का समापन करते हैं।
जलाभिषेक सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या प्रदोष काल (शाम सूर्यास्त के समय) में करना सबसे उत्तम माना जाता है। जल चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना और बेलपत्र अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है।
प्रशासन की ओर से हर साल यात्रा मार्गों पर विशेष सुरक्षा और यातायात प्रबंध किए जाते हैं, इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइन जरूर चेक करें।
FAQs:
कांवड़ यात्रा 2026 कब से कब तक है?
30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक, पूरे सावन महीने।
जल चढ़ाने का सबसे शुभ दिन कौन सा है?
सावन के सोमवार और सावन शिवरात्रि (11 अगस्त)।
जल चढ़ाने का सही समय क्या है?
ब्रह्म मुहूर्त या प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय)।