Skip to main content
Spiritual Guides

6 मुखी रुद्राक्ष किसका होता है? जानें इसके देवता, ग्रह और पौराणिक कथा

6 मुखी रुद्राक्ष किसका होता है? जानें इसके देवता, ग्रह और पौराणिक कथा

एक दाना, उस पर छह लकीरें, और उन छह लकीरों के पीछे छिपी है एक ऐसी कथा जिसमें शिव का तेज, अग्नि का ताप, गंगा का जल और छह माताओं का प्रेम शामिल है। जब कोई पूछता है कि 6 मुखी रुद्राक्ष किसका होता है, तो इसका जवाब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक पूरी पौराणिक यात्रा है।

इस लेख में हम जानेंगे कि यह रुद्राक्ष किस देवता को समर्पित है, इसका ग्रह कौन सा है, छह मुखों का अर्थ क्या है और इस जानकारी से आपको रुद्राक्ष चुनने में क्या मदद मिलती है।

यह भी पढ़ें: 6 मुखी रुद्राक्ष के फायदे: पूरी जानकारी | 6 मुखी रुद्राक्ष कैसा होता है? असली की पहचान

संक्षिप्त उत्तर

6 मुखी रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का होता है। कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र हैं। उन्हें स्कंद, षडानन, कुमार, सुब्रह्मण्य और दक्षिण भारत में मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है। शिव पुराण में छह मुख वाले रुद्राक्ष को स्पष्ट रूप से कार्तिकेय का स्वरूप बताया गया है।

पहलूविवरण
देवताभगवान कार्तिकेय (षडानन)
माता-पिताभगवान शिव और माता पार्वती
ग्रहशुक्र
चक्रस्वाधिष्ठान
वाहनमोर
अस्त्रशक्ति (वेल)

कार्तिकेय की जन्म कथा: छह मुख कैसे बने?

प्राचीन काल में तारकासुर नाम के असुर ने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से वरदान माँगा कि उसकी मृत्यु केवल शिव के पुत्र के हाथों हो। उस समय भगवान शिव गहरी समाधि में थे और माता सती के वियोग के बाद विवाह से दूर थे। तारकासुर को लगा कि वह अमर हो गया है और उसने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया।

देवताओं की प्रार्थना पर माता पार्वती ने कठोर तपस्या की और शिव से उनका विवाह हुआ। शिव का दिव्य तेज इतना प्रचंड था कि उसे कोई सँभाल नहीं पा रहा था। अग्नि देव ने उसे धारण किया, फिर गंगा ने, और अंत में वह तेज सरकंडों के वन (शरवण) में जा गिरा। वहाँ छह बालक प्रकट हुए।

उन बालकों का पालन छह कृत्तिकाओं ने किया। कृत्तिकाओं के नाम पर ही बालक का नाम कार्तिकेय पड़ा। जब माता पार्वती वहाँ पहुँचीं और उन्होंने छहों बालकों को एक साथ गले लगाया, तो वे एक शरीर में मिल गए, लेकिन छह मुख बने रहे। इसी कारण उन्हें षडानन यानी छह मुख वाला कहा जाता है।

बड़े होकर कार्तिकेय देवताओं के सेनापति बने और उन्होंने तारकासुर का वध करके तीनों लोकों को भय से मुक्त किया।

छह मुखों का आध्यात्मिक अर्थ

विद्वान कार्तिकेय के छह मुखों की कई व्याख्याएँ करते हैं। सबसे प्रचलित दो इस प्रकार हैं।

पहली व्याख्या: पाँच इंद्रियाँ और मन

आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा, ये पाँच ज्ञानेंद्रियाँ हैं और छठा है मन। 6 मुखी रुद्राक्ष को इन छहों पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इसे एकाग्रता और आत्म-नियंत्रण से जोड़ा जाता है।

दूसरी व्याख्या: छह आंतरिक शत्रु

काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर (ईर्ष्या) को षड्रिपु कहा जाता है। कार्तिकेय जिस तरह असुर पर विजय पाते हैं, उसी तरह यह रुद्राक्ष इन छह आंतरिक शत्रुओं पर विजय की प्रेरणा देने वाला माना जाता है।

6 मुखी रुद्राक्ष और शुक्र ग्रह

ज्योतिष परंपरा में 6 मुखी रुद्राक्ष का स्वामी ग्रह शुक्र माना जाता है। शुक्र प्रेम, सौंदर्य, कला, विलासिता और वैवाहिक सुख का कारक है। जब कुंडली में शुक्र कमज़ोर होता है, तो रिश्तों में दूरी, आकर्षण की कमी या जीवन में सुख-साधनों की कमी महसूस होने की मान्यता है।

यहाँ एक रोचक संतुलन दिखता है। कार्तिकेय साहस और अनुशासन के देवता हैं, जबकि शुक्र कोमलता और प्रेम का ग्रह है। यही मेल इस रुद्राक्ष को “दृढ़ता के साथ मधुरता” का प्रतीक बनाता है। दक्षिण भारत की कुछ परंपराओं में कार्तिकेय को मंगल ग्रह से भी जोड़ा जाता है, इसलिए कई ज्योतिषी मंगल दोष में भी इसका सुझाव देते हैं।

स्वाधिष्ठान चक्र से संबंध

योग परंपरा में 6 मुखी रुद्राक्ष को स्वाधिष्ठान चक्र से जोड़ा जाता है, जो नाभि के नीचे स्थित माना जाता है। यह चक्र भावनाओं, इच्छाओं और रचनात्मकता का केंद्र है। इसके संतुलन को भावनात्मक स्थिरता और रचनात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है।

भारत में कार्तिकेय के प्रमुख तीर्थ

  • पलनी (तमिलनाडु): मुरुगन के छह प्रमुख धामों में से एक।

  • तिरुचेंदूर (तमिलनाडु): समुद्र तट पर स्थित, जहाँ तारकासुर वध के बाद की कथा से जुड़ा माना जाता है।

  • कार्तिक स्वामी मंदिर (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड): उत्तर भारत में कार्तिकेय का प्रसिद्ध मंदिर।

  • पेहोवा (हरियाणा): कार्तिकेय मंदिर, जो प्राचीन परंपरा से जुड़ा है।

दक्षिण भारत में स्कंद षष्ठी का पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है, और उत्तर भारत में कार्तिक मास को कार्तिकेय से जुड़ा माना जाता है।

यह जानकारी रुद्राक्ष चुनने में कैसे मदद करती है?

जब आप जानते हैं कि रुद्राक्ष किस देवता का है, तो उसके साथ आपका जुड़ाव गहरा होता है। धारण करते समय आप कार्तिकेय के गुणों, साहस, अनुशासन और विजय, का ध्यान कर सकते हैं। इससे रुद्राक्ष सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि आपके संकल्प का रोज़ का साथी बन जाता है।

कार्तिकेय का ध्यान करते हुए धारण

  1. सोमवार या शुक्रवार की सुबह स्नान करें।

  2. कार्तिकेय या शिव परिवार की तस्वीर के सामने दाना रखें।

  3. मोर पंख या लाल फूल अर्पित करें।

  4. “ॐ ह्रीं हुं नमः” या “ॐ शरवणभवाय नमः” का 108 बार जाप करें।

  5. संकल्प लेकर दाहिनी कलाई या गले में धारण करें।

संबंधित लेख

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

6 मुखी रुद्राक्ष किस भगवान का है?

यह भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का स्वरूप माना जाता है।

6 मुखी रुद्राक्ष का ग्रह कौन सा है?

इसका स्वामी ग्रह शुक्र माना जाता है।

क्या 6 मुखी रुद्राक्ष गणेश जी का होता है?

नहीं। गणेश जी से जुड़ा अलग “गणेश रुद्राक्ष” होता है, जिस पर सूँड जैसा उभार होता है। 6 मुखी उनके बड़े भाई कार्तिकेय का है।

कार्तिकेय की पूजा के लिए कौन सा दिन शुभ है?

मंगलवार और हर महीने की शुक्ल षष्ठी तिथि कार्तिकेय पूजा के लिए शुभ मानी जाती है। स्कंद षष्ठी पर इनकी विशेष पूजा होती है। रुद्राक्ष धारण के लिए सोमवार या शुक्रवार चुना जाता है।

क्या 6 मुखी रुद्राक्ष पहनने के लिए कार्तिकेय भक्त होना जरूरी है?

नहीं। कोई भी व्यक्ति इसे पहन सकता है। देवता की जानकारी सिर्फ आस्था और ध्यान को गहरा करती है।

मुरुगन भक्तों के लिए 6 मुखी क्यों खास है?

क्योंकि मुरुगन और कार्तिकेय एक ही देवता हैं, और षडानन रूप सीधे छह मुखों से जुड़ा है।

निष्कर्ष

6 मुखी रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का प्रतीक है, जो साहस, अनुशासन और विजय के देवता हैं। शुक्र ग्रह से इसका जुड़ाव इसमें प्रेम और रचनात्मकता का रंग भरता है। इस कथा को जानकर जब आप यह दाना धारण करते हैं, तो वह आपकी आस्था और संकल्प, दोनों को मज़बूत करता है।

नामावेद का 6 मुखी नेपाली रुद्राक्ष लैब सर्टिफाइड और पंडितों द्वारा अभिमंत्रित है। देखें: प्रमाणित 6 मुखी नेपाली रुद्राक्ष

अस्वीकरण: यह जानकारी पौराणिक ग्रंथों, ज्योतिष परंपरा और लोक मान्यताओं पर आधारित है।

Keep Reading

Talk to our Astrologer

Nama Veda Astrologer

Usually replies in a few seconds

Get Free Astrology Guidance

Share your name and mobile number to start chatting with our astrologer.

👤
📱

🔒 Your number stays private — used only for this consultation.

Scroll to Top