श्रावण मास, जिसे सावन भी कहते हैं, हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है और यह पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित है। इसका सबसे बड़ा धार्मिक कारण है समुद्र मंथन की पौराणिक कथा।
कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन किया, तो सबसे पहले हलाहल नामक भयंकर विष निकला। इस विष से पूरी सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया — इसी कारण उन्हें “नीलकंठ” कहा जाता है।
विष के प्रभाव से शिवजी का शरीर अत्यधिक गर्म हो गया, तब देवताओं ने उन्हें शीतलता देने के लिए जल अर्पित किया। यह घटना श्रावण मास में हुई मानी जाती है, इसलिए इस महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने यानी जलाभिषेक को विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
इसके अलावा, श्रावण मास मानसून के मौसम में आता है, जब प्रकृति हरी-भरी होती है — यह नवजीवन और शुद्धिकरण का भी प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस महीने में व्रत, संयम और सात्विक जीवनशैली अपनाने की परंपरा है।
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