सावन अष्टमी हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है — यह हर पक्ष (शुक्ल व कृष्ण) में एक बार आती है। यह तिथि देवी दुर्गा और भगवान शिव दोनों की पूजा के लिए शुभ मानी जाती है।
इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, देवी मंदिरों में दर्शन करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं। कुछ क्षेत्रों में सावन अष्टमी को कालाष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है, जो भगवान भैरव को समर्पित है।
अष्टमी तिथि की सटीक तारीख हर साल पंचांग के अनुसार बदलती है, इसलिए सावन 2026 की सटीक अष्टमी तिथि के लिए स्थानीय पंचांग या मंदिर से पुष्टि जरूर करें।
पूजा विधि सरल है — सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें, देवी या शिवजी की प्रतिमा पर फूल, दीप और नैवेद्य अर्पित करें, और मंत्र जाप के साथ पूजा संपन्न करें।
FAQs
सावन अष्टमी किसकी पूजा के लिए मनाई जाती है?
देवी दुर्गा और भगवान शिव, दोनों की पूजा शुभ मानी जाती है।
क्या हर महीने अष्टमी आती है?
हां, हर चंद्र मास में दो अष्टमी तिथियां आती हैं।
सावन अष्टमी और कालाष्टमी में क्या संबंध है?
कुछ क्षेत्रों में सावन अष्टमी को कालाष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है।