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Jal Abhishek Ka Shubh Samay 2026

Jal Abhishek Ka Shubh Samay 2026

जलाभिषेक सावन महीने की सबसे मूल और सरल पूजा विधि है, जिसे कोई भी भक्त बिना किसी विशेष सामग्री के भी कर सकता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए विष पान किया था, जिससे उनका शरीर अत्यधिक गर्म हो गया था — देवताओं ने उन्हें शीतलता देने के लिए जल अर्पित किया, यही परंपरा आज जलाभिषेक के रूप में जीवित है।

शुभ समय: जलाभिषेक के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) सबसे उत्तम माना जाता है। अगर सुबह संभव न हो, तो प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास का समय भी शुभ माना जाता है।

विधि: तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल या गंगाजल भरें, इसमें थोड़ा दूध और काले तिल मिला सकते हैं। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल की धार अर्पित करते हुए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। इसके बाद बेलपत्र, सफेद फूल और अक्षत चढ़ाएं।

सावन 2026 में सोमवार (3, 10, 17, 24 अगस्त) और शिवरात्रि (11 अगस्त) पर जलाभिषेक करना विशेष फलदायी माना गया है।

FAQs

जलाभिषेक का सबसे शुभ समय क्या है?

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) या प्रदोष काल।

जलाभिषेक में कौन सा जल इस्तेमाल करें?

शुद्ध जल या गंगाजल, चाहें तो दूध मिला सकते हैं।

क्या रोज जलाभिषेक करना जरूरी है?

नहीं, लेकिन सोमवार और शिवरात्रि पर करना विशेष शुभ माना जाता है।

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